डिजिटलीकरण के कारण यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)ने आम लोगों के लिए डिजिटल पेमेंट को बेहद आसान बना दिया है. नैशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया(NPCI) अब लोगों के लिए उधार लेने की प्रक्रिया को भी सरल बनाने जा रहा है. NPCI की यह पहल है यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस(ULI), जिसे क्रेडिट क्रांति की दिशा में अगला बड़ा कदम माना जा रहा है.
क्या है ULI
एक डिजिटल प्लैटफॉर्म है, जो लेंडर्स यानी उधार देने वाले, बोरोवर्स यानी उधार लेने वाले और डिजिटल लोन सर्विस प्रोवाइडर्स को एक नेटवर्क पर जोड़ता है. इसे अगस्त 2024 में लॉन्च किया गया था. इसका मकसद है क्रेडिट को उतना ही आसान बनाना , जितना पेमेंट को UPI ने बना दिया था. ULIके जरिए कोई भी व्यक्ति अपने डेटा की सहमति देकर अलग-अलग बैंकों और फाइनैस कंपनियों से तेजी लोन ऑफर देख सकेगा और तुरंत आवेदन कर सकेगा. इससे खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में रह रहे लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है.
ऐसे काम करेगा ULI
ULI एक डिजिटल प्लैटफार्म होगा , जहां उधारकर्ता (BORROWER)अपनी क्रेडिट जानकारी शेयर करने की सहमति देगा, बैंक और फिनटेक कंपनियां उस डेटा के आधार पर लोन ऑफर करेंगी और पूरा प्रोसेस पूरी तरह रीयल टाइम में होगा. इसमें क्रेडिट स्कोरिंग अंडरराइटिंग और डेटा वेरिफिकेशन सब कुछ डिजिटल रूप से जुड़ा रहेगा. यानी अब बैंक या ऐप को बार-बार दस्तावेज, पहचान या सिबिल स्कोर की जांच में हफ्तों नहीं लगेंगे.
कुछ चुनौतियां
ULI पायलट फेज में है. इससे बैंकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी डेटा की सटीकता सुनिश्चित करना और नॉन परफार्मिंग एसेट (NPA) यानी बकाया लोन के बढ़ने के जोखिम को नियंत्रित रखना. जानकार की मानें तो जब तक उधारकर्ताओं (BORROWERS) को अपने डेटा से जुड़े स्पष्ट अधिकार और सुरक्षा नहीं मिलते, तब तक इस सिस्टम का भरोसा पूरी तरह नहीं बन पाएगा.