पशुपालन में वरदान साबित हो रहा है यह मशीन, मार्केट में बढ़ रही है मांग

Updated : Sun, Oct 12th, 2025 9:52 PM IST
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फोरेज हारवेस्टर.

खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है. किसान अब मशीनों का प्रयोग कर अपनी खेती को उन्नत कर रहे हैं. ये मशीनें कई तरीकों से किसान के लिए बेहतर साबित हो रहे हैं. यही कारण है कि परंपरागत तरीकों से धीरे-धीरे किसान मशीनों की ओर रुख कर रहे हैं ताकि समय और श्रम दोनों की बचत हो सके. इन्हीं आधुनिक मशीनों में से एक है फॉरेज हार्वेस्टर, जिसने पशुपालन और चारे की व्यवस्था को आसान बना दिया है. यह मशीन किसानों को बड़े पैमाने पर चारा काटने और संग्रह करने में मदद करती है, जिससे दूध उत्पादन और पशुपालन की लागत पर सीधा असर पड़ता है. जब कब लागत में बेहतर उत्पादन हो तक स्वाभाविक है कि किसान को बेहतर मुनाफा मिलता है. यही कारण है कि मशीनों का प्रयोग कृषि के विभिन्न गतिविधियों में किया जा रहा है. बता दें कि पशुपालन कर रहे किसानों के लिए फॉरेज हार्वेस्टर केवल एक मशीन नहीं बल्कि यह खेती किसानी में उनके लिए वरदान साबित हो रहा है.

किस काम की है फॉरेज हार्वेस्टर

फॉरेज हार्वेस्टर एक ऐसी मशीन है जिसका इस्तेमाल हरे चारे को काटने और उसे बारीक रूप में तैयार करने के लिए किया जाता है. यह मशीन खासकर उन किसानों के लिए उपयोगी है जो डेयरी व्यवसाय या बड़े पैमाने पर पशुपालन करते हैं. पहले जहां किसानों को हाथ से चारा काटने में काफी मेहनत करनी पड़ती थी, वहीं फॉरेज हार्वेस्टर कुछ ही घंटों में कई एकड़ खेत का चारा काटकर पशुओं के लिए तैयार कर देता है. इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह चारे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटता है जिससे पशु आसानी से उसे खा सकें और पाचन में दिक्कत न हो. साथ ही, इससे समय और मानव श्रम दोनों की बचत होती है और किसान कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर पाते हैं.

विभिन्न प्रकार के होते हैं फॉरेज हार्वेस्टर

भारत में फॉरेज हार्वेस्टर कई प्रकार के उपलब्ध हैं. मुख्य रूप से इसे ट्रैक्टर माउंटेड, सेल्फ-प्रोपेल्ड और मिनी फॉरेज हार्वेस्टर के रूप में वर्गीकृत किया जाता है. ट्रैक्टर माउंटेड फॉरेज हार्वेस्टर उन किसानों के लिए उपयुक्त है जिनके पास पहले से ट्रैक्टर मौजूद है. यह ट्रैक्टर से जुड़कर काम करता है और कम लागत में बेहतर विकल्प माना जाता है. वहीं, सेल्फ-प्रोपेल्ड फॉरेज हार्वेस्टर बड़ी मशीन होती है जो खुद ही खेत में चलती है और बड़े पैमाने पर चारा काटने के लिए उपयोग की जाती है. यह महंगी जरूर है लेकिन बड़े किसानों और डेयरी फार्म के लिए बेहद उपयोगी है. मिनी फॉरेज हार्वेस्टर छोटे किसानों के लिए बनाया गया है जो कम बजट में सीमित क्षेत्र का चारा काट सकते हैं.

लाखों रुपए तक की होती है फॉरेड हार्वेस्टर

कीमत की बात करें तो भारत में फॉरेज हार्वेस्टर की कीमत प्रकार और क्षमता के अनुसार अलग-अलग होती है. मिनी फॉरेज हार्वेस्टर की कीमत लगभग 80 हजार से 1.5 लाख रुपये तक हो सकती है. ट्रैक्टर माउंटेड फॉरेज हार्वेस्टर की कीमत 2 लाख से 6 लाख रुपये तक रहती है. वहीं, सेल्फ-प्रोपेल्ड फॉरेज हार्वेस्टर की कीमत 20 लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक जा सकती है. कीमत में यह अंतर मशीन की क्षमता, ब्रांड और सुविधाओं पर निर्भर करता है. बता दें कि फॉरेज हार्वेस्टर किसानों के लिए खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाने वाली मशीन है. इससे न केवल समय और श्रम की बचत होती है, बल्कि पशुपालन को भी नई दिशा मिलती है. छोटे किसानों के लिए जहां मिनी और ट्रैक्टर माउंटेड हार्वेस्टर किफायती हैं, वहीं बड़े पैमाने पर काम करने वालों के लिए सेल्फ-प्रोपेल्ड हार्वेस्टर उपयुक्त साबित होते हैं. यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में फॉरेज हार्वेस्टर भारतीय कृषि में एक अहम भूमिका निभाने वाले हैं.

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