मात्र 60 दिनों में मालामाल हुए किसान, आलू की इन 5 किस्मों की खेती का कमाल

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खेत से लाए गए ताजे आलू.

किसान गेहूं- चावल, दलहन,तीलहन के अलावा सब्जियों की भी खेती करते हैं. बता दें कि सब्जियों की डिमांड हमेशा मार्केट में हमेशा बनी रहती है और अनाजों की तुलना में सब्जियां कम समय में तैयार हो जाती है. इसके साथ ही अनाज के मुकाबले सब्जियों की खेती में कम लागत में ज्यादा उत्पादन मिलता है. ऐसे में किसान समय रहते सब्जियों की खेती पर जोर देते हैं. अगर किसान समय रहते सिंतबर के पहले सप्ताह में आलू की फसल लगा लेते हैं तो किसानों को कम समय और कम लागत में अच्छा फायदा होगा.

इन किस्मों की करें खेती

  1. सूर्या आलू

आलू की यह किस्म लगभग 70 से 90 दिनों तैयार हो जाती है. यदि इस किस्म को मध्य सितंबर में लगाई गई तो यह अगेती फसल के लिए उपयुक्त है. इसकी उपज 150 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. मध्य सितंबर में लगाई गई अगेती फसल से लगभग 150 से 200 क्विंटल प्रित हेक्टयर उपज ली जा सकती है. जबकि अक्तूबर के पहले सप्ताह में लगाने से इसकी पैदावार 250 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.

  1. कोलंबा आलू

कोलंबा आलू की एक लोकप्रिय किस्म है. यह किस्म दुनिया के 50 से अधिक देशों में उगाई जाती है. इस आलू की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है. यह दिखने में आकर्षक होता है और इसका स्वाद भी बहुत अच्छा होता है. यह कई रोगों के प्रति प्रतिरोधी होता है. यह आलू लगभग 75 दिनों में तैयार हो जाता है. इसे लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है. यह कम उपजाऊ भूमि में भी अच्छी पैदावार देता है.

  1. सैंटाना आलू

सैंटाना आलू भारत के विभिन्न क्षेत्रों में उगाई जाती है. अन्य आलू के किस्मों की तुलना में यह अधिक उपज देता है. इस किस्म के आलू आ आकार बड़ा और एक समान होता है. इनका स्वाद भी अच्छा होता है. सैंटाना आलू कई आम आलू के रोगों के प्रति प्रतिरोधी होता है.

  1. कुफरी सिंदूरी आलू

यह कम समय में पकने की वजह से किसानों को कम लागत में ज्यादा मुनाफा देती है. कुफरी सिंदूरी आलू की फसल 80 दिन के भीतर ही तैयार हो जाती है. जल्दी तैयार होने के कारण बाजार में किसानों को उपज का अच्छा दाम मिलता है. आलू की इस किस्म का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 300 क्विंटल तक है.

  1. कुफरी पुखराज आलू

यह आलू की एक लोकप्रिय किस्म है. आलू की इस किस्म से किसानों को अच्छा उत्पादन मिलता है. इसे कम समय में तैयार किया जा सकता है. भारत में खासकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में यह किस्म बड़े पैमाने पर उगाई जाती है. इसके कंद संफेद होते हैं और अंदर से पीले होते हैं.

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