अरुणाचल प्रदेश: 1,000 मेगावाट नैयिंग जलविद्युत परियोजना (Naying Hydroelectric Project) के लिए जन सुनवाई 12 नवंबर को शि-योमी (Shi-Yomi) जिले में

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डैम की सुंदर तस्वीर.

अरुणाचल प्रदेश के शि-योमी (Shi-Yomi) जिले में 12 नवंबर को 1,000 मेगावाट की नैयिंग जलविद्युत परियोजना (Naying Hydroelectric Project) के लिए जन सुनवाई आयोजित की जाएगी. यह सुनवाई यापिक सामुदायिक भवन (Yapik Community Hall) में होगी.

यह जन सुनवाई पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 के तहत की जा रही है. इसका उद्देश्य परियोजना से प्रभावित लोगों और हितधारकों को मौका देना है ताकि वे अंतिम पर्यावरण स्वीकृति से पहले अपने सुझाव, विचार और आपत्तियाँ रख सकें.

इस मौके पर अरुणाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड , नीपको (NEEPCO) और राज्य पर्यावरण एवं वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहेंगे. वे लोगों की राय सुनेंगे और उनके सवालों के जवाब देंगे.

जिले के उपायुक्त तुंगी लोया (Deputy Commissioner Tungi Loya) ने बताया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सहभागी होगी ताकि परियोजना के अगले चरण में जाने से पहले जनता की बात सुनी जा सके.

🌊 परियोजना के बारे में (About the Project)

नैयिंग जलविद्युत परियोजना (Naying Hydroelectric Project) ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी सियोम (Siom) जिसे स्थानीय रूप से योमगो (Yomgo) कहा जाता है, पर बनाई जानी है.
यह एक नदी-प्रवाह (run-of-the-river) परियोजना होगी, जिसमें कंक्रीट का बांध, भूमिगत बिजलीघर और सुरंग प्रणाली बनाई जाएगी.

इस परियोजना को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने वर्ष 2013 में मंजूरी दी थी, लेकिन पर्यावरण और सामाजिक कारणों से इसमें देरी होती रही. निर्माण कार्य 2028 के आसपास शुरू होने की उम्मीद है और 2032 तक बिजली उत्पादन शुरू हो सकता है.

⚙️ संभावनाएं और चिंताएँ (Potential & Concerns)

यह परियोजना हर साल लगभग 4,966.77 मिलियन यूनिट (MU) बिजली पैदा कर सकती है. इससे उत्तर-पूर्व भारत में बिजली की आपूर्ति मजबूत होगी और देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों में मदद मिलेगी.

हालांकि, पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों ने परियोजना के पारिस्थितिक प्रभाव को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि इससे वन क्षेत्र का नुकसान हो सकता है, जिससे जैव विविधता पर असर पड़ेगा.

मेचुका (Mechuka) क्षेत्र के एक स्थानीय निवासी ने कहा,

“हम विकास चाहते हैं, लेकिन अपने पर्यावरण और संस्कृति की रक्षा भी जरूरी है। जन सुनवाई में हमारी बातों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।”

लोगों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और जंगल आधारित आजीविका पर प्रभाव को लेकर भी अपनी चिंता जताई है.

⚡ राज्य का जलविद्युत मिशन (Arunachal’s Hydro Power Mission)

यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश की “हाइड्रो पावर दशक (2025-35)” योजना का हिस्सा है। इस योजना का लक्ष्य 10,000 मेगावाट (10 गीगावाट) स्वच्छ ऊर्जा क्षमता विकसित करना है.
यह योजना नीपको (NEEPCO) और अरुणाचल प्रदेश जलविद्युत निगम लिमिटेड (APHPCL) के संयुक्त सहयोग से लागू की जा रही है.

मुख्यमंत्री पेमा खांडू (Pema Khandu) ने कहा है कि जलविद्युत विकास राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देगा, रोजगार बढ़ाएगा और भारत के 2070 तक के नेट-जीरो कार्बन लक्ष्य को हासिल करने में योगदान करेगा.

📢 जन सुनवाई का महत्व (Why the Public Hearing Matters)

12 नवंबर की यह जन सुनवाई नैयिंग परियोजना के भविष्य की दिशा तय कर सकती है.
अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो यह अरुणाचल प्रदेश की सबसे बड़ी और रणनीतिक परियोजनाओं में से एक होगी.

यह सुनवाई केवल विकास का कदम नहीं, बल्कि यह भी जांचेगी कि क्या राज्य पर्यावरण और समाज दोनों के प्रति समान रूप से जिम्मेदार रह सकता है.

पर्यवेक्षकों के अनुसार यह सुनवाई अरुणाचल प्रदेश में टिकाऊ विकास और स्थानीय सहभागिता के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित होगी.

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