भारत की अधिकांश आबादी खेती पर ही निर्भर है. देश की लगभग 80 फीसदी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से खेती पर निर्भर है. आमतौर पर जब पारंपरिक खेती से किसान पर्याप्त आय नहीं कमा पाते हैं तो किसान पशुपालन जैसे विकल्प की ओर रुख करने लगते हैं. बता दें कि किसान बकरी, मुर्गी, सू्अर पालन के साथ ही गाय, भैंस पालन करके अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. पशु पालन धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों के साथ हीं शहरी क्षेत्रों में भी बिजनेस के रुप में आकार ले रहा है. देश में हजारों की संख्या में युवा पशुपालन में रुचि ले रहे हैं. ऐसे में पशुपालन कर रहे किसानों के लिए जरुरी है कि वे पशुओं की बेहतर ढ़ंग से ख्याल रखें. खासकर पशुओं को गर्भावस्था के दौरान विशेष देखभाल की जरुरत होती है.
गर्भवस्था में होती है कई दिक्कतें
गर्भावस्था में पशओं को विभिन्न प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. गर्भावस्था के दौरान पशुओं को कई तरह की शारीरिक संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इनमें से कुछ समस्याएं सामान्य हैं तो कुछ बहुत ही गंभीर हैं.
- गर्भवती पशुओं में हार्मोनल परिवर्तन के कारण थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है.
- कुछ जानवरों में गर्भावस्था के दौरान भूख कम हो सकती है जिससे वजन कम हो सकता है.
- गर्भावस्था के दौरान कब्ज या दस्त जैसी पाचन संबंधी समस्याएं पशुओं में सामान्य है.
- कुछ जानवरों में गर्भावस्था के दौरान सांस लेने में कठिनाई और चेहरे और पैर में सूजन हो जाती है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विशेषज्ञ का कहना है कि पशुपालक किसान पशुओं की गर्भावस्थआ के दौरान उनका विशेष ध्यान रखें क्योंकि इस दौरान पशुओं को बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में विशेषज्ञ गर्भावस्था के दौरान पशुओं की देखभाल के लिए निम्न सलाह देते हैं.
- गर्भवती पशु को संतुलित और पौष्टिक आहार दें जिसमें प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स शामिल हों. हरा चारा और सूखा चारा दोनों ही महत्वपूर्ण हैं.
- पशुओं का रहने के स्थान पर स्वच्छता हमेशा बनाए रखें. ताजे और साफ पानी की हमेशा उपलब्धता रखें.
- समय पर पशुओं को टीकाकरण करवाएं और पशु चिकित्सक से नियमित जांच कराते रहें.
4.किसी भी समस्या के लक्ष्ण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
- पशु की दिनचर्या पर निगरानी रखें ताकि किसी भी प्रकार की असामान्यता को जल्दी पहचाना जा सके.