रबी फसल की बुवाई 306 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गई है- केन्द्र सरकार

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गेहूं की लहलहाती फसल.

रबी फसलों के अंतर्गत खेती के क्षेत्र की प्रगति को साझा करते हुए केन्द्र ने कहा कि 21 नवंबर 2025 तक रबी फसल की बुवाई 306 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गई है. जबकि पिछले साल इस समय तक यह आंकड़ा 272.8 लाख हेक्टेयर था. यानी रबी फसलों के रकबे में कुल 12 परसेंट की वृध्दि दर्ज की गई है. ये आंकड़े दलहन और तिलहन सहित प्रमुख रबी फसलों में प्रगति को दर्शाते हैं. साथ ही इन आकड़ों से अनुमान लगाया जा सकता है कि इस बार रबी की उत्पादन अभी तक के सबसे उच्चतम स्तर पर होने जा रही है.

मानसून का मिला साथ

इस साल दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व मानसून ने खेती को मजबूत सहारा दिया है. मानसून के दौरान ज्यादा बारिश और अक्टूबर-नवंबर के शुरुआती दिनों में मिली पर्याप्त बारिश के कारण खेतों में नमी भरपूर है. इसके साथ ही देश के प्रमुख जलाशय 90 फीसदी क्षमता तक भरे होने से सिंचाई को लेकर किसानों को अतिरिक्त भरोसा मिला है. यही कारण है कि बुवाई का काम समय पर और तेजी से आगे बढ़ रहा है.

गेहूं की बुआई में बेढ़त

रबी फसलों की सबसे प्रमुख फसल गेहूं की फसल है. इस बार गेहूं की बुवाई अन्य रबी फसलों से आगे दिखाई दे रही है. अब तक 128.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं बोया जा चुका है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 107.79 लाख हेक्टेयर था. लगभग 20 फीसदी की बढ़ोतरी से यह साफ संकेत मिलता है कि किसान इस बार गेहूं की अधिक उत्पादन को लेकर आशान्वित हैं.

दलहन उत्पादन में भी बढ़त

गेहूं के बाद रबी की सबसे महत्वपूर्ण फसल दाल है. इस बार दालों का भी रकबा बढ़कर 73.36 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यह 68.15 लाख हेक्टेयर था. बता दें कि दालों में सबसे ज्यादा चना दाल की बुवाई में बढ़ोत्तरी देखी गई है. चना की बुवाई में 9 फीसदी की वृध्दि हुई है.

मोटे अनाजों में बढ़ रही है किसानों की रुचि

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल मोटे अनाजों के रकबे में 14 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है. मक्का की बात करें तो पिछले साल मक्का की बुवाई 5.38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी, जबकि इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 6.57 लाख हेक्टेयर हो गई है. वहीं ज्वार की बता करें इसके भी उत्पादन क्षेत्र में उल्लेखनीय बढ़त हुई है. आपको बता दें कि मोटे अनाजों की फसलें कम पानी में बेहतर उत्पादन देने के लिए जानी जाती हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने में भी मदद मिलती है.

तिलहन क्षेत्र में भी 5.5 परसेंट की बढ़त

रबी फसलों में इस बार तिलहन क्षेत्रों में भी बढ़त देखने को मिल रही है. सरसों की रकबा लगभग 70 लाख हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 74 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है. बता दें कि तिलहन के उत्पादन में वृध्दि होने से देश की तेल आयात निर्भरता घटेगी.

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