पारंपरिक फसलों की खेती में कम आमदनी होने के कारण किसान अब खेती में नए प्रयोग कर रहे हैं. इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के सागर जिले के किसान पारंपरिक फसलों से हटकर अब औषधीय फसलों की खेती कर रहे हैं. बता दें कि आजकल के दौर में बदलते लाइफस्टाईल के कारण लोग हेल्दी फूड हैबिट अपना रहे हैं. यही कारण है कि औषधीय फसलों की डिमांड मार्केट में खूब हो रही है. औषधीय फसलों में खासकर आंवला, अश्वगंधा, ऐलोवेरा आदि की डिमांड ज्यादा है. औषधीय फसलों की डिमांड अधिक होने के कारण किसानों को लगता है कि वे पारंपरिक फसलों से हटकर इन औषधीय फसलों की खेती करेंगे तो अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. इसी कड़ी में सागर जिले के किसानों ने पारंपरिक फसलों को छोड़ अब अश्वगंधा की खेती कर रहे हैं.
अश्वगंधा की खेती कर रहे हैं किसान
किसान को जब पारंपरिक फसलों की खेती कर उचित कमाई नहीं होती है तो वे कमाई के और भी अनेक साधन तलाशने लगते हैं. कुछ किसान खेती के अलावा पशुपालन को कमाई का बेहतर साधन के रुप में देखते हैं तो कुछ किसान खेती में विभिन्न प्रकार के प्रयोग कर रहते हैं. ऐसे में सागर जिले के किसान को जब पारंपरिक फसलों की कमाई से आमदनी नहीं हुई तो वे औषधीय फसलों की खेती को ध्यान देने लगें. सागर जिले के किसानों का मानना है कि पारंपरिक फसल जैसे की गेहूं-चना की तुलना में अश्वगंधा की खेती से तीन-चार गुना लाभ मिलता है.
युवा किसान प्रशांत पटेल का कहना है कि पारंपरिक खेती से केवल घर खर्च निकलता था या कभी-कभी उसमें भी मुश्किल होती थी, जबकि अश्वगंधा प्रति एकड़ पारंपरिक फसलों से कहीं ज्यादा आमदनी दे रहा है. वहीं बंडा तहसील के बिलौआ गांव के किसान सुरेन्द्र सिंह ठाकुर ने इस वर्ष 4 एकड़ में खेती शुरू कर अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद जताई है.
सोशल मीडिया और एक्सपर्ट की सलाह
सागर जिले की किसानों ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए बहुत से जानकार लोगों से सलाह लेकर अश्वगंधा की बुवाई की गई है. इसके अलावा किसानों ने कहा कि इस नए तरीके खेती में उन्हें कृषि विज्ञान केन्द्र से भी भरपूर मार्गदर्शन और सहयोग मिला है.