मूंगेर जिला के तारापुर का क्षेत्र धान उत्पादन का गढ़ माना जाता है. यही कारण है कि इस क्षेत्र को धान का कटोरा भी कहा जाता है. लेकिन इस बार धान की खेती कर रहे किसान को बहुत ही संकट का सामना करना पड़ रहा है. बता दें कि धान की फसल पर मधुआ कीट का प्रकोप है. मधुआ बीमारी ने तेजी से खेतों में पक चुकी बालियों को गिरा-गिराकर बर्बाद किया है, उसने किसानों की उम्मीदें और मेहनत दोनों को झकझोर कर रख दिया है. तारापुर क्षेत्र के अंतर्गत अफजलनगर, गनैली, लौना, खैरा, संग्रामपुर, मझगांय, बढौनिया, गोविंदपुर और दीदारगंज क्षेत्रों में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है.
क्या कहते हैं किसान
हमारे रिपोर्टर रणधीर सिंह से किसानों ने कहा कि शुरूआती मानसून में अधिक नमी के कारण कई रोगों का प्रकोप दिख रहा था, लेकिन मधुआ बीमारी ने देखते ही देखते हजारों हेक्टेयर में फसल को चपेट में ले लिया. पकी हुई बाली खेतों में ही झुककर सड़ने लगी और पूरा मेहनताना मिट्टी में मिल गया. किसानों ने बताया कि डायथेन एम 45 जैसी रासायनिक दवाओं का छिड़काव भी बेअसर रहा और बीमारी रुकी नहीं. बिहारी लाल कुशवाहा, अरुण कुमार सिंह, रविरंजन कुमार और श्रवण सिंह बताते हैं कि जुताई,रोपाई, बीज, खाद और सिंचाई में लगाया गया खर्च भी अब निकलना मुश्किल लग रहा है.कृषि समन्वयक मनोज कापरी के अनुसार अधिक यूरिया और रसायनिक खाद का उपयोग रोग को बढ़ावा देने का बड़ा कारण है.उन्होंने किसानों को संतुलित उर्वरक,समय पर निगरानी और रोकथाम पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है.
बता दें कि जानकार के अनुसार फसल को मधुआ बीमारी से बचाने के लिए संतुलित मात्रा में उर्वरक, संतुलित सिंचाई और विशेष निगरानी में रखरखाव की जरुरत है.