आलू और कवक से दूर होगी प्रोटीन की कमी, वैज्ञानिकों ने किया क्रांतिकारी खोज-

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खेत से लाए गए ताजे आलू.

भारत दुनिया में सबसे बड़े प्रोटीन युक्त फसलों के उत्पादन करने वाले देशों में से एक है. इसके बावजूद अभी भी भारत में प्रोटीन की कमी एक गंभीर समस्या है. हाल ही में भारतीय बाजार अनुसंधान ब्यूरो द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई की 73 परसेंट भारतीय प्रोटीन का सेवन नहीं करते हैं और मात्र 10 परसेंट भारतीय ही दैनिका आहार की आवश्यकता को पूरा कर पाते हैं. आपको बता दें कि यह समस्या सिर्फ पोषण संबंधी ही नहीं है, बल्कि यह एक आर्थिक, सांस्कृतिक और बुनियादी ढांचें से भी जुड़ी है. इसी समस्या से निजात पाने के लिए कोलकाता में वैज्ञानिकों की एक टीम ने कुछ बेहतरीन सामाधान खोजा है. वैज्ञानिक पादप आधारित सामाधान विकसीत करने की कोशिश में जुड़े हैं. आपको बता दें कि यदि यह प्रयोग सफल हो गया तो भारत में पोषण से संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के तरीके में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है.

पोषण संबंधी नए समाधानों की जरुरत क्यों-

भारत में प्रोटीन संकट एक विरोधाभास है. भले ही भारत में भरपूर मात्रा में प्रोटीन युक्त फसलें उगाई जाती हो लेकिन पोषण के लिए इस प्रोटीन का इस्तेमाल अभी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. इंडिया टुडे के मुताबिक जानकार कहते हैं कि हमारे शरीर में प्रोटीन की कमी मुख्य रुप से तीन कारणों से होते हैं.हम पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त खाद्द पदार्थ नहीं खाते हैं, पौधों पर आधारित प्रोटीन को शरीर द्वारा अवशोषित करना कठिन होता है, तथा पशु प्रोटीन कई लोगों के लिए महंगा विकल्प है. उन्होंने ने आगे कहा कि जिन दालों को हम आमतौर पर प्रोटीन का स्त्रोत मानते हैं, भारत उनका एक बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है.लेकिन ज्यादातर दालों के साथ चुनौती यह है कि हम दालों में मौजूद प्रोटीन का 100 परसेंट इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं.

आलू और कवक से होगी प्रोटीन की पूर्ति-

इंडिया टुडे के मुताबिक एफटीएसआई के अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक की टीम प्रोटीन के इस्तेमाल के तरीके पर पुनर्विचार कर रही है. उनकी सबसे बड़ी सफलता आलू और कवक, और सरसों की खल्ली का इस्तेमाल कर प्रोटीन यु्क्त पदार्थ बनाने में है.
जानकार कहते हैं कि हम कवक का उपयोग करते हैं क्योंकि नियंत्रित वातावरण में इसे उगाना बहुत आसान है. हम कुछ उच्च प्रोटीन मशरुम लाने की कोशिश कर रहे हैं. इन उच्च प्रोटीन युक्त कवकीय खाद्द पदार्थों की कटाई पारंपरिक खेतों में नहीं की जाएगी बल्कि इन्हें बायोरिएक्टरों में ठोस अवस्था के माध्यम से तैयार किया जाएगा जिससे स्वच्छ, मापनीय और अधिक नियंत्रित उत्पादन वातावरण उपलब्ध होगा.

आपको बता दें कि वैज्ञानिक आलू का प्रयोग प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ बनाने में कर रहे हैं. जैसा कि हम जानते हैं कि आलू सामान्य रुप से उलब्ध होने वाली सब्जियां में से एक है. जानकार का मानना है कि इस आलू को दूध के रुप में बदलने की काफी संभावना है. आलू में मौजूद प्रोटीन बेहद अच्छा प्रोटीन होता है. इसका रूपांतरण अनुपात मांस जितना ही अच्छा होता है.
इसके साथ ही वैज्ञानिक आलू के दूध को आधार बनाकर आइसक्रीम के साथ प्रयोग कर रहे हैं, जो न केवल प्रोटीन में उच्च हैं, बल्कि आधुनिक उपभोक्ताओं को भी आकर्षित करते हैं.

घरेलू प्रोटीन उद्योग पर है जोर-

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह केवल भारत में पोषण संबंधी समस्याओं का समाधान भर नहीं है. वे कहते हैं कि बड़े पैमाने पर प्रोटीन बनाने वाली कंपनियां बहुत ज्यादा नहीं हैं. यह ज्यादतर चीन से आता है, इसलिए यह उद्योग के लिए व्हे प्रोटीन के अलावा बड़े पैमाने पर प्रोटीन निर्माण में प्रवेश करने का अवसर है. वैज्ञानिक इसे रोजगार के अवसर और घरेलू उद्योग को बढ़ाकर आर्थिक तरक्की को सुनिश्चित करने का एक बेहतरीन अवसर के रुप में देख रहे हैं.

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रयोग केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीयों के लिए भारत में बनें व्यवसायिक रुप से व्यवहार्य, पौष्टिक खाद्य पदार्थों की पाइपलाइन भी तैयार कर रही है.

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