बरसात के मौसम के तुरंत बाद किसान आलू की बुवाई चालू कर देते हैं. सितंबर में अगेती और अक्तूबर में पछेती बुवाई होती है. इस समय किसान विभिन्न प्रकार के आलू के बीजों की बुवाई करते हैं. बता दें कि उपज की गुणवत्ता बहुत हद तक बीज की क्वालिटी पर भी निर्भर करती है. अच्छी क्वालिटी की बीज से फसल की अच्छी उपज होती है. ऐसे में जो भी किसान आलू की बुवाई कर रहे हैं उनको आलू की उन्नत किस्मों की बीज के विषय में जानना चाहिए. मार्केट में आलू के ऐसे -ऐसे बीज उपलब्ध हैं जिसके माध्यम से कम समय में आलू की बंपर पैदावर की जा सकती है.
अच्छी कमाई और विदेशों में भी है डिमांड
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जानकार बताते हैं कि आलू के इन उन्नत किस्मों की बीज की डिमांड विदेशों के मार्केट में भी खूब है. कुफरी पुखराज, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी गंगा, कुफरी अशोका काफी बेहतर प्रजाति हैं. जानकार बताते हैं कि हरेक प्रजाति की अपनी महत्व है जैसे की टेबल पोटेटो की बात जाए तो वर्तमान में किसान कुफरी बहार, कुफरी ख्याति प्रजाति का किसान उपयोग कर सकते हैं, जिसके माध्यम से काफी अच्छी पैदावर मिलेगी. इन प्रजातियों में सबसे लोकप्रिय कुफरी मानिक, कुफरी जामुनिया, कुफरी केसर आदि हैं. इन प्रजातियों में खनिज और पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. जिसके कारण फसल की पैदावार भी बंपर होती है और जो फसल होती है वो स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती है. इसी तरह कुफरी मोहन, कुफरी सूर्या और कुफरी आनंद की बुवाई करते हुए किसान अच्छी पैदावार कर सकते हैं. बता दें की इनकी लागत सामान्य प्रजाति के अनुरुप है. ये 70-80 दिनों में तैयार हो जाते हैं. किसान को कम लागत और कम समय में अच्छी कमाई हो सकती है.
ऐसे उपलब्ध होंगे बीज
इच्छुक किसान जो अपने खेतों में इन प्रजातियों की आलू को लगाना चाहते हों वे अपने जिले के उद्यान विभाग से बीज के लिए संपर्क कर सकते हैं. आपके डिमांड के अनुरुप आपको बीज उपलब्ध हो जाएगी. बता दें कि बीज की डिमांड देश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ विदेशों में भी देखने को मिलती है.