किसान अतिरिक्त आय के साधन के रुप में मुख्य फसल की खेती के साथ-साथ अन्य किस्मों की खेती या फिर पशुपालन पर जोर देते हैं . अन्य किस्मों की खेती में किसान उद्यानिकी फसलों की खेती कर स्थाई कमाई कर रहे हैं. इन फसलों की खेती में किसान को सरकारी सहायता भी मिलती है. जिससे किसान उद्यानिकी फसलों के लिए प्रोत्साहित होते हैं. बता दें कि पाम ऑयल की मांग और उत्पादकता को ध्यान में रखते हुए पाम की खेती के लिए किसान को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके राज्य और केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय तिलहन एवं ऑयल पाम मिशन के तहत साझा अभियान शुरु किया है. इसके तहत 2 हजार 682 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में पाम पौधों का रोपण हो चुका है. ऐसे में जो भी किसान पाम की खेती करना चाह रहे हैं उनके लिए जरुरी है कि वे पाम की खेती के विषय में जानकारी हासिल कर लें.
पाम ऑयल की है हाई डिमांड
पाम ऑयल सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाला वनस्पति तेल है. इसका उपयोग बिस्किट, चॉकलेट, मैगी, स्नैकस और गैर खाद्य जैसे साबुन, डिटर्जेंट, बायोफ्यूल आदि उत्पादों में होता है. यही कारण है कि इसका डिमांड हमेशा बने रहता है.
1-1 लाख रुपए की सब्सिडी
केन्द्र सरकार ने देश की खाद्य तेलों पर आयात निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से नेशनल मिशन ऑन ए़डिबल ऑयल के माध्यम से पाम ऑयल के उत्पादन को नई दिशा दी है. यही कारण है कि देशभर में 3.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर पॉम की खेती हो चुकी है. साथ ही साथ सरकार पाम की खेती कर रहे किसानों को 1 लाख रुपए सब्सिडी के रुप में दे रही है. साथ ही सरकार के द्वारा किसानों को पाम की खेती के लिए प्रशिक्षण भी दी जा रही है.
सरकार के प्रोत्साहन का नतीजा है कि गत वर्ष में पाम ऑयल का घरेलू उत्पादन 15 परसेंट बढ़ा है.बता दें कि केन्द्र सरकार ने इसका उत्पादन 28 लाख टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.
इन राज्यों में पाम की खेती को बढ़ावा
केन्द्र सरकार तेलंगाना, असम, मिजोरम, ओड़िशा, आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पाम की खेती को बढ़ावा दे रही है. विशेष रुप से छत्तीसगढ़ के बस्तर और दंतेवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पाम की खेती से रोजगार और आय का नया साधन जुटाने की दिशा में काम कर रही है.