भारत एक कृषि प्रधान देश है. कृषि और कृषि से जुड़े विभिन्न गतिविधियां पूरे भारत में जबर्दस्त रुप से किया जाता है. ऐसे में कृषि से जुड़ा काम आर्थिक और सामाजिक रुप से बहुत महत्व का है, खासकर पशुपालन आर्थिक रुप से मजबूत होने के लिए एक बेहतर विकल्प है. आपको बता दें कि पशुपालन में खासकर भैंस का पालन मुनाफे का अच्छा जरिए बनते जा रहा है. भैंस का दूध गाय के मुकाबले ज्यादा वसा वाला होता है इससे मार्केट में भैंस का दूध काफी डिमांड में रहता है. मार्केट में भैंस के दूध का ज्यादा डिमांड होने से काफी लोग भैंस पालन की ओर आर्कषित हुए हैं. ऐसे में आप भी अगर पशुपालन करना चाहते हैं, भैंस पालन कर अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो इस खबर में हम आपको भैंस के उन नस्लों के विषय में बताने जा रहे हैं जो दुध उत्पादन के लिए बेस्ट हैं.
- मुर्रा भैंस-
मुर्रा भैंसों के नस्लों में से लोकप्रिय नस्ल का भैस है. भारत हीं नहीं दुनिया भर में मुर्रा सबसे ज्यादा दूध देने वाली भैंसों में से एक है. आपको बता दें कि मात्र तीन साल की उम्र में यह भैंस ग्रर्भाधरण करने के लिए तैयार हो जाती है. मुर्रा भैंस का दूध सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. फैट की बात करें तो कुल फैट का 7 परसेंट फैट मुर्रा भैंस के दूध में पाया जाता है.
वहीं अगर दूध उत्पादन की बात करें तो एक दिन में 15-20 लीटर दूध देने की क्षमता मुर्रा भैंस को विशिष्ट बनाती है.
- नीली रवी नस्ल भैंस-
नीली रवी भैंस पाकिस्तान के मिटगुमरी क्षेत्र में प्रमुख रुप से पाए जाती है. यह नस्ल दूध उत्पादन के लिए फेमस है. एक दिन में लगभग 15-16 लीटर दूध देती है. इसके दूध में करीब 7 परसेंट फैट पाया जाता है जिससे इसके दूध का डिमांड मार्केट में बना रहता है. आपको बता दें कि भारत में ये नस्ल मध्यप्रदेश में मुख्य रुप से पाया जाता है. इस नस्ल की भैंस का इस्तेमाल खेती बाड़ी में भी किया जाता है खासकर मादा भैंस जिसका वजन करीब 450 किलोग्राम होता है.
- जाफराबादी भैंस-
जाफराबादी भैंस की दूध देने की क्षमता बहुत है. एक दिन में इस नस्ल की भैंस करीब 18-20 लीटर दूध देती है. दूध देने की क्षमता के अलावा इस नस्ल के भैंस का दूध बहुत हीं मीठा होता है जो इसे विशिष्ट बनाता है. भारत में जाफराबादी नस्ल की भैंस गुजरात के भावनगर, जूनागढ़, अमरेली आदि इलाकों में बड़े पैमाने पर पाला जाता है. हर साल गर्भधारण की क्षमता इस भैंस को विशेष बनाती है.
- मेहसाणा नस्ल का भैंस-
गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में पाई जाने वाली भैंस की यह नस्ल प्रतिदिन 10-15 लीटर दूध देती है. इसके दूध में फैट भी काफी मात्रा में पाया जाता है जिसका प्रयोग सेहत के लिए बेस्ट है. ज्यादा समय तक दूध देना इस नस्ल के भैंस को विशिष्ट बनाती है.
- भदवारी नस्ल-
भदवारी नस्ल का भैंस उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में पाला जाता है. मध्य प्रदेश में खासकर ग्वालियर इस नस्ल की भैंस का प्रजनन केंद्र है. एक बियान्त में लगभग 1000 लीटर दूध देने की क्षमता इस नस्ल को विशिष्ट बनाती है. इनके दूध में फैट की भी मात्रा अच्छा होती है जिसका प्रयोग सेहत के लिए फायदेमंद है.