पशुपालकों के लिए वरदान है हीरामणी घास, प्रयोग मात्र से दूध के उत्पादन और क्वालिटी में होती है बढ़ोत्तरी

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हीरामणी घास.

भारत में पशुपालन मुनाफे का व्यवसाय है. ऐसे में पशुपालक कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाने की सोचते हैं. पशुपालक को पशुओं के भोजन में ज्यादा खर्च करना पड़ जाता है. अगर पशु दुधारु है तो उसे एक नियमित मात्रा में पोषक तत्व की जरुरत होती है. खासकर दुधारु पशु को प्रोटीन की जरुरत सबसे अधिक होती है. आपको बता दें कि पशुओं को प्रोटीन फूड खिलाना महंगा पड़ता है. ऐसे में हम आपको आज ऐसे घास के विषय में बताएंगे जो प्रोटीन की कमी तो पूरी करती है ही साथ में दूध के क्वालिटी और क्वांटिटी को भी बढ़ाता है. हीरामणी नामक यह घास अगर पशुपालक गाय-भैंस को खिला दें तो एक हफ्ते में कम से कम 10-15 परेंसट दूध बढ़ाया जा सकता है. अगर आप भी पशुपालक हैं या फिर पशुपालन रुचि रखते हैं तो आपको इस घास के विषय में जरुर जानना चाहिए ताकि दूध उत्पादन में वृध्दि हो सके और अधिक मुनाफा बटोरा जा सके. इस खबर में हम आपको हीरा मणी घास की पूरी जानकारी देने जा रहे हैं, तो इस खबर को आप गौर से पढ़िए.

हीरामणी की विशेषताएं-

भारत में लगभग 800 किस्मों की घास पाई जाती है. इन्हीं में से हीरामणी एक अद्भुत घास है. आपको बता दें कि एक बार यदि यह उगा लें तो यह कम से कम 20 साल तक चलती है. वहीं घास की ऊंचाई 15 फीट तक होती है. इसमें पत्तियां भी अधिक होती है. इनके पत्तियां में काफी मिठास होती हैं जिससे गाय इसे खुब पसंद करते हैं. आपको बता दें कि इस घास में ग्लुकोस की भी मात्रा बेहतर होती है, जिसके प्रयोग से गाय-भैंस को उचित मात्रा में प्रोटीन मिल पाता है. उचित मात्रा में प्रोटीन मिलने के कारण हीं पशुओं के दूध की क्वालिटी और क्वांटिटी में वृध्दि होती है. इसलिए पशुपालक हीरामणी घास का प्रयोग दूध की उत्पादन बढ़ाने में करते हैं.

हीरामणी का खेती है फायदेमंद-

आपको बता दें कि अगर घास को एक बार लगा दिया जाए तो 20 साल तक की फुर्सत हो जाती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जानकार बताते हैं कि घास को लगाने वक्त दो बाई दो बाई की गांठे लगाएं जिससे घास को पानी की जरुरत कम पड़ती है. आपको बता दें कि घास सालों भर सदाबहार रहती है जिससे इसके खेती के जबर्दस्त फायदे होते हैं वहीं पशुपालन में इसके हाई डिमांड के कारण भी किसान इसकी खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

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