इस खाद से होगी बंपर पैदावार, धान रोपाई के 10 दिन बाद डाल दे खेतों में ये खाद-

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हरी-भरी धान की खेत.

मानसून का समय किसानों के लिए राहत का संदेश तो लाता ही है, साथ ही साथ अपने साथ कई चुनौतियों भी लाता है. भारत के मैदानी क्षेत्रों में धान की रोपाई शुरु हो चुकी है. कई जगह तो रोपाई खत्म हो चुकी है और पहली सिचांई भी की जाने लगी है. इस समय किसान खेतों में पुरी उत्साह के साथ जुटे हुए हैं ताकि अच्छी पैदावर हो सके. लेकिन अच्छी पैदावार के लिए कुछ बातें जाननी जरुरी है खासकर वैसे किसान के लिए जो रोपाई कर चुके हैं और पहली सिचांई की तैयारी कर रहे हैं. इसी कड़ी में विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जानकार बताते हैं कि धान की रोपाई के 10 दिन बाद खेतों में सिचांई करने के दौरान NPK खाद का इस्तेमाल करना चाहिए. जानकार की मानें तो अच्छी पैदावर के लिए 1 एकड़ में की एक बोरी का इस्तेमाल करना पर्याप्त है.

खाद का वर्किंग मैकेनिज्म-

जानकार के अनुसार डीएपी खाद का उपयोग धान की फसल में कल्ले बढ़ाने में प्रयोग किया जाता है और पौधों की जड़ों को मजबूती प्रदान करने में भी डीएपी खाद बहुत आवश्यक है. जानकार आगे बताते हैं कि डीएपी खाद पौधों को जरुरी पोषक तत्व प्रदान करती है. उन्होंने कहा कि पौधों को अपने संपूर्ण काल में 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है. नाइट्रोजन और फास्फोरस उनमें से एक है. डीएपी खाद पानी कि उपस्थिति में मिट्टी में आसानी से घुल जाती है. मिट्टी में घुलने के बाद यह खाद फसलों के जड़ों तक जाती है और जड़ों का संपूर्ण विकास करती है. खाद के काम करने के तरीका पर जानकार बताते हैं कि, यदि आपने कोई फसल बोई है और उसमें यह खाद डाली तो यह पौधों की जड़ों और कोशिकाओं (CELLS) का विभाजन कर देती है. इसी तरीके यह पौधों की शाखाएं बढ़ाने में और पौधों की जड़ों को मजबूती प्रदान करने में काम करती है.

समझें पोषक तत्वों का पूरा समीकरण-

जानकारों के मुताबिक फसलों के अच्छे पैदावर, पौधें के हरे भरे रहने और पौधों के अच्छे स्वास्थ के लिए जरुरी है कि सही समय पर फसलों को जरुरी पोषक तत्व दिया जाए. यदि जरुरी पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश (NPK) सही मात्रा में मिले तो पैदावार अच्छी होगी और पौधें हरे भरे और स्वस्थ भी रहेंगे. आपको बता दें कि डीएपी (DAP) की एक बोरी में 23 किलोग्राम फॉस्फोरस और 9 किलोग्राम नाइट्रोजन होता है. NPK खाद में नाइट्रोजन की मात्रा पाई जाती है जो धान के पौधों में पत्तियों और तनों के विकास के लिए आवश्यक है.

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