थ्रेशर- अनाज की कटाई और मड़ाई में किसानों का सबसे भरोसेमंद साथी

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थ्रेशर मशीन.

भारत में खेती-किसानी परंपरागत रूप से मेहनत और श्रम पर आधारित रही है. खासकर फसल की कटाई और मड़ाई (थ्रेशिंग) का काम लंबे समय तक हाथ से होता रहा, जिसमें बहुत समय और मजदूर लगते थे. लेकिन आधुनिक तकनीक ने इस काम को आसान और तेज बना दिया है. थ्रेशर नाम की मशीन ने किसानों को फसल की मड़ाई से जुड़ी मुश्किलों से छुटकारा दिलाया है. आज यह मशीन भारतीय कृषि में उत्पादन बढ़ाने और श्रम घटाने का एक अहम साधन बन चुकी है. किसान इस मशीन का उपयोग कर अपने समय की बचत कर रहे हैं साथ ही जो काम पहले ज्यादा समय लेती थी अब आसानी से कम समय में बेहतर तरीके से हो रही है. ऐसे में किसानों के लिए जरुरी है वे इस थ्रेशर मशीन का उपयोग अपनी खेती किसानी में करें.

क्या होता है थ्रेशर मशीन

थ्रेशर एक कृषि उपकरण है जिसका इस्तेमाल कटाई के बाद अनाज को डंठल और भूसी से अलग करने के लिए किया जाता है. पहले किसान लकड़ी की लाठियों और बैलों की मदद से अनाज अलग करते थे, जो समय और मेहनत दोनों की मांग करता था. थ्रेशर इस प्रक्रिया को आसान बना देता है. इसमें फसल डाली जाती है और मशीन के अंदर घूमते ड्रम और ब्लेड फसल को मड़कर अनाज को अलग कर देते हैं. थ्रेशर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कम समय में बड़ी मात्रा में अनाज तैयार कर देता है और अनाज का नुकसान भी कम होता है. यह गेहूं, धान, ज्वार, बाजरा और मक्का जैसी फसलों की मड़ाई के लिए उपयोगी है. इसके इस्तेमाल से किसानों को कटाई के बाद अनाज बाजार में जल्दी पहुंचाने का अवसर मिलता है, जिससे उन्हें बेहतर दाम भी मिल सकता है.

थ्रेशर के प्रकार

भारत में थ्रेशर के कई प्रकार उपलब्ध हैं. इन्हें मुख्य रूप से मल्टीक्रॉप थ्रेशर, पेडल थ्रेशर और ट्रैक्टर-माउंटेड थ्रेशर में बांटा जाता है. मल्टीक्रॉप थ्रेशर सबसे ज्यादा लोकप्रिय है क्योंकि यह गेहूं, मक्का, बाजरा और अन्य कई फसलों की मड़ाई कर सकता है. पेडल थ्रेशर छोटे किसानों के लिए उपयुक्त है और इसे पैरों से चलाकर धान की मड़ाई की जाती है. यह किफायती और सरल मशीन है. ट्रैक्टर-माउंटेड थ्रेशर बड़े और मध्यम किसानों के बीच सबसे ज्यादा उपयोग में आता है. यह ट्रैक्टर से जुड़कर चलता है और बड़े पैमाने पर अनाज को तेजी से अलग करता है. इसके अलावा, डीजल या इलेक्ट्रिक से चलने वाले थ्रेशर भी बाजार में उपलब्ध हैं.

15 हजार से लाखों रुपए तक की होती है थ्रेशर

कीमत की बात करें तो भारत में थ्रेशर की कीमत इसके प्रकार और क्षमता के अनुसार अलग-अलग होती है. पेडल थ्रेशर की कीमत लगभग 15 हजार रुपये से शुरू होती है. छोटे इलेक्ट्रिक या डीजल थ्रेशर की कीमत 40 हजार से 80 हजार रुपये तक हो सकती है. मल्टीक्रॉप थ्रेशर की कीमत 1 लाख से लेकर 3 लाख रुपये तक जाती है. वहीं, ट्रैक्टर-माउंटेड और हाई कैपेसिटी थ्रेशर की कीमत 2 लाख से लेकर 6 लाख रुपये तक हो सकती है. कीमत ब्रांड, क्षमता और तकनीक पर निर्भर करती है.

बता दें कि थ्रेशर ने किसानों के लिए फसल की मड़ाई को आसान और सटीक बना दिया है. इससे न केवल समय और श्रम की बचत होती है बल्कि अनाज का नुकसान भी काफी कम हो जाता है. आने वाले समय में जैसे-जैसे किसान आधुनिक कृषि उपकरणों की ओर बढ़ेंगे, थ्रेशर उनकी आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.

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