कटाई के बाद नहीं होगा नुकसान, सोलर ड्रायर देगा समाधान

Facebook
Twitter
WhatsApp
सोलर ड्रायर ग्रीनहाऊस तकनीक जैसा.

भारत में कृषि उत्पादों का एक बड़ा हिस्सा कटाई के बाद खराब हो जाता है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. खराब मौसम, नमी और उचित संरक्षण की कमी इस समस्या को और बढ़ा देते हैं. ऐसे में सोलर ड्रायर एक क्रांतिकारी समाधान बनकर उभर रहा है. ड्रायर सूरज की गर्मी से फलों, सब्ज़ियों और अनाज को प्राकृतिक रूप से सुखाकर लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करता है. न केवल यह बिजली की बचत करता है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय और सशक्तिकरण का रास्ता भी दिखा रहा है. भारतीय कृषि में यह एक हरित क्रांति का नया अध्याय है. आपको बता दें कि फसलें अक्सर मार्केट में पहुंचने से पहले ही मुरझा जाती थी. फसल धूप में सुखने से धूल और कीड़-मकोडे़ के चपेट में आने से बर्बाद हो जाते थें. लेकिन अब ग्रामीण भारत में छोटे पैमाने के सोलर ड्रायर जो एक ग्रीनहाउस जैसे ढ़ाचें हैं, इस कहानी को बदल रहे हैं. ये निष्क्रिय सौर ऊर्जा का उपयोग कर फसलों को जल्दी, स्वच्छतापूर्वक और कुशलता से सुखाते हैं. किसान बिना किसी केमिकल और मशीन के अपनी फसलों को संरक्षित कर रहे हैं और उनका शेलफ लाइफ बढ़ा रहे हैं. ऐसे में आप भी यदि किसान हैं और फसल बर्बाद होने की समस्या से परेशान हैं तो ये खबर आपके लिए है. इस खबर में हम आपको सोलर ड्रायर की संमपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं, जिसकी मदद से आप अपने फसल को बर्बाद होने से बचा सकते हैं और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

सोलर ड्रायर के क्या हैं मायने-

सोलर ड्रायर का उपयोग समय की मांग है. आपको बता दें कि भारत का सूखे फूल और उत्पाद का एक्सपोर्ट मार्केट काफी बड़ा है. अगर वित्तीय संदर्भ में बात करें तो यह लगभग 100 करोड़ रुपए सलाना का मार्केट है. ऐसे में सोलर ड्रायर का उपयोग भारतीय कृषि को उन्नत कर रहा है. जो उत्पाद कभी मंडियों में मुरझा जाते थे, अब उन्हें सीलबंद, लैबयुक्त और वर्ल्ड लेवल पर भेजा जा रहा है. न्यूतम निवेश के साथ किसान गेहूं और चावल जैसी कम लाभ वाली फसलों के स्थान पर अपराजीता, कैमोमाइल और तुलसी जैसे समृध्द फसलों की खेती कर रहे हैं.

  1. कई लोगों के लिए सोलर ड्रायर का उपयोग सिर्फ बर्बादी कम करना नहीं, बल्कि अपनी उपज, कमाई और समय पर नियंत्रण वापस पाना है.
  2. यह सिर्फ सुखाने के बारे में नहीं है, यह जलवायु स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देता है.
  3. यह जलवायु लचीलापन और जीरो कार्बन उत्सर्जन पर आधारित है.
  4. सोलर ड्रायर की मदद से महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाना है जो अक्सर फूलों की खेती में आगे होते हैं.
  5. इसमें लाखों ग्रामीण आजीविकाओं को बदलने की क्षमता है.
  6. खेत स्तर पर हीं एक्पोर्ट के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रोडक्ट तैयार करता है.

अच्छी उपज और कमाई के लिए ऐसे करें सोलर ड्रायर का उपयोग-

कृषि के क्षेत्र में सौर ऊर्जा से फसलों को सुखा कर वैल्यू ऐडेड उत्पाद तैयार करना एक वैकल्पिक बाजार बनकर उभरा है. यहां हम आपको बता रहे हैं कि किसान कैसे इस वैकल्पिक बाजार का उपयोग कर अपनी खेती से अच्छी उपज, उत्पाद की विविधता और अच्छी कमाई कर सकते हैं.

1.मार्केट की डिमांड को समझें-

भारत में खासकर फूल, मिर्च, जड़ी-बूटियां और फल जैसे सौर-सूखे उत्पादों की घरेलु बाजार में मांग बढ़ रही है. वहीं चाय, मसाले और सजावट के कच्चे माल के रुप में एक्सपोर्ट मार्केट में इनकी डिमांड बढ़ रही है.भारत वर्तमान में 20 से ज्यादा देशों को 500 से अधिक किस्मों के उत्पाद का एक्सपोर्ट करता है. बढ़ते ई-कामर्स के साथ यह उत्पादकों के लिए स्थिर मुनाफे का जरिया बन रहा है. ऐसे में आप इस क्षेत्र में व्यवसाय का सोच रहे हैं तो सबसे पहले अपने क्षेत्र की प्रमुख फसलों की सूची बनाएं. बाजारों पर अच्छे तरीके से रिसर्च कर लें और आगे बढ़ने से पहले मांग का पुर्वानुमान लगाएं.

  1. पारंपरिक खेती से बेहतर विकल्प –

गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों में भारी लागत लगती है और उनकी उपज में उतार-चढ़ाव होता रहता है. इसके विपरीत फूलों और जड़ी- बूटियों के लिए कम जमीन और कम पानी की जरुरत होती है, और वे हर मौसम में कई बार फसल देती हैं. सोलर ड्रायर के इस्तेमाल से फूल सुखाने से उत्पाद का मूल्य बढ़ता है और शेल्फ लाइफ भी बढ़ती है. फूलों की खेती करने की शुरुआत एक एकड़ से कम की फसल वाले खेत से शुरु करें. क्योंकि प्रति लीटर पानी की उपज और प्रति हेक्टेयर मुनाफा मुख्य फसलों से बेहतर है.

  1. सोलर ड्रायर करें स्थापित-

आपको बता दें कि 500 किलोग्राम क्षमता वाला पॉलीहाउस टाईप का ड्रायर 60,000 रुपए की स्थानीय सामाग्री से बनाया जाता है, जो 3 लाख की बिजनेस यूनीट्स की तुलना में काफी सस्ता है. आपको बता दें कि खुली धूप में सुखाने से धूल और बारिश से फसल खराब होने का खतरा रहता है, जबकि सोलर ड्रायर उत्पाद की रक्षा करता है और सुखाने के समय को 12-15 घंटे तक बढ़ा देता है.
छोटी शुरुआत करें. सुखाने के चक्र, संचालन लागत और उत्पाद की गुणवत्ता पर नजर रखें.

  1. समझें टेकनिल और फाइनेनशियल पक्ष-

रिसर्च से पता चला है कि सोलर ड्रायर प्रतिदिन 400-500 किलोग्राम प्रसंस्करण कर सकते हैं, जो बिजली और ईंधन सुखाने की जगह ले सकते हैं और प्रति ड्रायर सालाना तीन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम कर सकते हैं. अपनाने में आनी वाली बाधाओं में जागरुकता, वित्तपोषण और तकनीकी जानकारी शामिल हैं.

  1. ब्रांडिंग का करें निर्माण-

सीईईडब्लयू का कहना है कि सौर ऊर्जा से सुखाने की प्रक्रिया को सबसे ज्यादा फायदा तब मिलता है जब इसे किसान- नेतृत्व वाली सहकारी समितियों और आजीविका उद्दमों का समर्थन मिलता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रहेजा सोलर जैसे स्टार्टअप और गैर-सरकारी संगठनों के समर्थन के निर्यात और घरेलु खुदरा चैनलों तक पहुंच खोल दी है.

  1. समझदारी से बनेगी बात-

शुरुआत में एक या दो ज्यादा मांग वाली फसलों पर ध्यान दें. फिर जैसे-जैसे व्यवस्था स्थिर होती जाए, इसे बढ़ाएं. समय के साथ दक्षता, लागत और राजस्व पर नजर रखें.

ये हैं सोलर ड्रायर के सारथी-

आपको बता दें कि सोलर ड्रायर का उपयोग भारत के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक , किसान और उद्दमी लोग इसका प्रयोग कर खुद के व्यवसाय को उन्नत तो कर ही रहे हैं साथ ही साथ दूसरे लोगों के लिए प्रेरणा साबित हुए हैं.

2019, में पूर्व फार्मा कार्यकारी, शिवराज निषाद ने कानपुर के शेखपुर गांव में एक सोलर ड्रायर स्थापित किया. अपराजिता के फूलों से सालाना 20-30 टन फूलों का प्रसंस्करण करते हैं, जिससे उन्हें लगभग 1 लाख रुपए प्रति माह की कमाई होती है. इस सोलर ड्रायर ने पारंपरिक खुली हवा में सुखाने की प्रक्रिया की जगह ले ली है, जिससे बाहर के दिनों की तुलना में केवल 12 से 15 घंटा में ही स्वच्छता सुनिश्चित हो जाती है.

वहीं हिमालय में, टिहरी गढ़वाल जिले के महिलाओं के नेतृ्त्व वाले समूहों ने औषधीय जड़ी-बूटियों और फूलों को संरक्षित करने के लिए सोलर ड्रायर का इस्तेमाल किया. उन्होंने अपनी उपज को हवा और बारिश से होने वाले नुकसान से बचाया- जो खुली धूप में सुखाने की तुलना में एक बड़ा सुधार था.

इसी कड़ी में एक कहानी, जाधव दंपत्ती की है, जिन्होंने जनवरी 2023 में एक सोलर ड्रायर लगवाया. बारिश के कारण काले अंगूर की फसल बर्बाद होने के बाद, इस ड्रायर ने 750 किलो अंगूर बचाए और मुनाफा कमाया. तब से उन्होंने अपनी यूनीट्स का विस्तार पांच यूनीट्स तक कर लिया है, जहां टमाटर, प्याज, धनिया और मेथी प्रसंस्करण किया जाता है, और सौर ऊर्जा से सुखाई गई किशमिश की कीमत खुले में सुखाई गई किशमिश की तुलना में पांच गुना ज्यादा है.

Leave a Reply

न्यूज़लेटर सब्सक्राइब करें

मखाना बोर्ड :-क्या है आगे की चुनौतियां ?

क्या है यूनिवर्सल पेंशन स्कीम

कॉलेज ड्रॉपआउट से अरबों डॉलर की कंपनी खड़ा करने की कहानी-

आज का चुनाव विभिन्न परिपेक्ष्य में

क्या होता है loan foreclosure , ऐसे बंद कराएं समय से पहले अपना लोन अकाउंट

ADVERTISEMENT

सिर्फ खबर पढ़ें.

ADVERTISEMENT

सिर्फ खबर पढ़ें.

ख़बर वाटिका
लॉगइन/अकाउंट बनाएं

आपकी गोपनीय जानकारी सुरक्षित है। आपका नंबर या ईमेल केवल अकाउंट वेरिफिकेशन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

Or Continue With

New to Khabar Vatika? Register Now!