मेरे प्रिय पाठकों, यह खबर देश के सुदूर पूर्व जहां सुबह-सुबह सुरज की किरणें भारत की मिट्टी को सबसे पहले स्पर्श करती है यानि की अरुणाचल प्रदेश से है.
अरुणाचल प्रदेश के पाक्के केसांग जिला में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) की छात्राओं ने पिछले रविवार को न्यांगनो गांव से मार्च शुरू किया. बच्चियाँ 65 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए रात भर पैदल चलकर सुबह लेम्मी स्थित जिला मुख्यालय पहुँचीं. ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा की 90 छात्राओं ने भूगोल और राजनीति विज्ञान की कक्षाओं के लिए तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की. इनके हाथों में पोस्टर थे, जिन पर लिखा था ‘बिना शिक्षक वाला स्कूल बस एक इमारत है.’ इससे पहले शिक्षकों से परेशान स्कूल और बच्चियाँ लगातार अपनी माँग उठा रही थीं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी. आप सोचिये इस विषय पर जरा. क्या यह ख़बर अख़बारों और टेलिविज़न चैनलों की सबसे बड़ी ख़बर नहीं बननी चाहिए थी? ‘कराची पर क़ब्ज़े’ की ख़बर देने वाले TV चैनलों को अपने देश की ख़बर नहीं मिल पा रही ! आप जिस दो कौडी की मीडिया को दिन रात देखते रहते हैं जरा रुककर सोचिये ये मीडिया आपको क्या परोस रही है. बता दें कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू के लिए नब्बे छात्राओं का रात भर पैदल चलना कोई मायने नहीं रखता! शिक्षा, संविधान का वादा है . हमारी सरकार हर दिन संविधान से हमें इसी तरह दूर ले जा रही है. ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के नारे में उलझाए रखने वाले लोग सारे देश के बच्चों को एक जैसे स्कूल तक नहीं दे सकते . आप नारेबाज़ी पर तालियां पीटने में व्यस्त हैं; बच्चियाँ सारी रात अपनी बुनियादी माँग के लिए पैदल चलने को मजबूर हैं.
गौर करिएगा सरकार और मीडिया किस तरह आपके दिमाग़ को खोखला और सवाल रहित बना रहे हैं.आपका ध्यान फालतू के मुद्दों पर है. उनका ध्यान, आपको ‘भरमाए’ रखने पर है.
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