खेती में बीज बोना सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. यदि बीज सही गहराई और उचित दूरी पर न डाले जाएं तो फसल की पैदावार प्रभावित होती है. पहले किसान हाथ से बीज बोते थे, जिससे असमानता और बर्बादी अधिक होती थी. लेकिन अब सीड ड्रिल (Seed Drill) मशीन ने इस परंपरागत पद्धति को बदल दिया है. यह उपकरण बीज बोने की आधुनिक तकनीक है जो न केवल मेहनत कम करता है बल्कि उत्पादन भी बढ़ाता है. इसके उपयोग से बीज की बर्बादी भी कम होती है जिससे किसान को कम लागत पर बेहतर उत्पादन मिलती है. ऐसे में फसल की बेहतरीन उत्पादन के लिए किसान को चाहिए की वे बीज और खाद डालने के लिए सीड ड्रिल का प्रयोग करें.
सीड ड्रिल है क्या
सीड ड्रिल एक कृषि उपकरण है, जिसका उपयोग बीज को एक समान दूरी और सही गहराई पर बोने के लिए किया जाता है. इसमें बीज रखने का टैंक, पाइप और नालियां होती हैं, जिनके माध्यम से बीज मिट्टी में जाते हैं. कुछ सीड ड्रिल में उर्वरक डालने की व्यवस्था भी होती है, जिससे बीज और खाद दोनों एक साथ डाले जा सकते हैं. इसका उपयोग गेहूं, धान, दलहन, तिलहन और सब्ज़ियों की बुआई में व्यापक रूप से किया जाता है.
विभिन्न प्रकार के सीड ड्रिल
- मैनुअल सीड ड्रिल – हाथ से चलने वाला, छोटे किसानों और बगीचों के लिए उपयुक्त.
- बुलॉक ड्रॉन सीड ड्रिल – बैलों से खींचकर चलाया जाने वाला, परंपरागत ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी.
- ट्रैक्टर माउंटेड सीड ड्रिल – ट्रैक्टर से संचालित, बड़े खेतों के लिए कारगर.
- जीरो टिल सीड ड्रिल – बिना जुताई किए सीधे बीज बोने की क्षमता, समय और लागत बचाने वाला.
- पावर ड्रिवन सीड ड्रिल – इंजन या मोटर से चलने वाला, आधुनिक और तेज़ तकनीक वाला.
सीड ड्रिल कीमत
सीड ड्रिल की कीमत इसके प्रकार और क्षमता पर निर्भर करती है. मैनुअल सीड ड्रिल 5,000 से 15,000 रुपये तक उपलब्ध है. बैलगाड़ी से चलने वाला सीड ड्रिल 20,000 से 30,000 रुपये तक आता है. ट्रैक्टर संचालित सीड ड्रिल की कीमत 50,000 रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये तक होती है. वहीं जीरो टिल सीड ड्रिल की कीमत 70,000 रुपये से शुरू होकर 2 लाख रुपये तक जा सकती है. भारत में शक्तिमान, महिंद्रा, सोनालिका और जॉन डियर जैसी कंपनियां इन्हें बड़े पैमाने पर बनाती हैं.
सीड ड्रिल से लाभ
- बीज की समान दूरी और गहराई पर बुआई.
- बीज और खाद दोनों का एक साथ प्रयोग.
- कम समय में बड़े खेत की बुआई.
- बीज और खाद की बर्बादी में कमी.
- बेहतर अंकुरण और अधिक उत्पादन.
- मजदूरी और लागत में बचत.