वोटर अधिकार यात्रा सासाराम से क्यों शुरू किया गया ?

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Voter Adhikar yatra
वोटर अधिकार यात्रा.

राहुल गांधी के द्वारा 7 अगस्त 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया गया जिसमें पूरे बारीकी से बताया गया कि कैसे कनार्टक के महादेवपुरा असेंबली में वोट की चोरी की गई है. चुनाव आयोग पर वोट चोरी को लेकर इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए.इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कांग्रेस पार्टी ने पूरी सतर्कता से एक घोषणा किया कि एक यात्रा बिहार से शुरू की जाएगी वोट चोरी के विरोध में इस यात्रा का नाम दिया गया  “वोटर अधिकार यात्रा”. बिहार के चुनाव को ध्यान में रख कर बिहार से ही शुरू की गई जो पूरे जोर शोर से समाप्त हुई.यात्रा की रूप रेखायह यात्रा 17 अगस्त 2025 से प्रारंभ किया गया है. लेकिन इसको शुरू करने से पहले जरूर सोचा गया होगा और इस यात्रा को बिहार के सासाराम जिले से शुरू किया गया. यह यात्रा 16 दिनों की थी जो सासाराम से शुरू होकर गया , भागलपुर, कटिहार, दरभंगा, सिवान होते हुए अंतिम में पटना पहुंचेगी. इस यात्रा में कुल 1600 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी जो बिहार चुनाव के परिपेक्ष्य में बहुत ही लाभदायक सिद्ध हो सकती है लेकिन कितना ये देखने लायक होगा ?

शुरुआत सासाराम से क्यों ?

इस यात्रा को बहुत ही चतुराई से और सोच समझ कर सासाराम से शुरू किया गया है जो कई कहानी बयान कर रही है. इस परिपेक्ष्य में नुशुर वाहिदी ने खूब लिखा है  एक नज़र का फ़साना है दुनिया  सौ कहानी है एक कहानी से.सासाराम रोहतास जिले का एक क्षेत्र है जो बहुत ही खास है राजनीति के दृष्टिकोण से. यह वही क्षेत्र है जहां से दलितों के महान नेता बाबू जगजीवन राम स्वतंत्र भारत के पहले लोकसभा चुनाव में जीत के आए थे और कांग्रेस के साथ 1979 तक बने रहें. हां ये भी सच के की इन्होंने आपातकाल के दौरान प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का विरोध किया और कांग्रेस को छोड़ दिया और कांग्रेस फॉरवर्ड डेमोक्रेसी के साथ जनता पार्टी में शामिल हो गए.अगर जगजीवन राम और राजद के सिद्धांत को मिलाया जाय तो साफ हो जाता है कि एक बार फिर से दलितों की आवाज के मुद्दे को उठाकर चुनाव को मोड़ने की कोशिश हो रही है महागठबंदन के द्वारा. क्योंकि जन स्वराज पार्टी कहीं न कहीं विकास , रोजगार और पलायन के मुद्दे से महागठबंधन को हानि पहुंचा रही है.इसके अलावा आपातकाल के दौरान जो विरोध हुआ जगजीवन राम जी के द्वारा उसको ठीक करने की कोशिश भी झलक रही है. क्योंकि सासाराम जगजीवन राम जी का स्वतंत्र भारत के पहले चुनाव का लोक सभा क्षेत्र रहा है. ये यात्रा शुरू से अंत तक जगजीवन राम के जीवन और सिद्धांत से जुड़ा है. यह यात्रा पटना पहुंचने से पहले भोजपुर भी घूमेगी जो जगजीवन राम की प्रारंभिक शिक्षा का क्षेत्र रहा है.इसी बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन को भी मुजफ्फरपुर में वोटर अधिकार यात्रा में शामिल किया गया जो साफ करता है कि यह यात्रा लोकतंत्र को बचाने के साथ साथ दलितों के आवाज की राजनीति को बढ़ाने की कोशिश है . बीते कुछ सालों में लालू प्रसाद यादव के ऊपर चले भ्रष्टाचार के मामलों ने इनके पुराने कार्यों को धूमिल किया है और कांग्रेस बिहार में बीते दसको से अच्छा नहीं कर पाई है जो महागठबंधन को इस रस्ते पे लाने के लिए मजबूर किया है.स्टालिन की भी पार्टी की उत्पत्ति पिछड़े वर्गों की आवाज उठाने के आंदोलनों से हुई है और राजद की भी यही इतिहास रही है जो साफ करता है कि बिहार में फिर से राजनीति कहीं न कहीं जाति आधारित होने जा रही है . ऐसे में दूसरे दलों को चुनौती मिल सकती है जो विकास की राजनीति को आधार बना कर सरकार बनाने की कोशिश कर रही है.

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